Infertility Causes in Hindi - बांझपन और उपचार

Infertility Causes in Hindi - बांझपन और उपचार - हर कपल चाहता है कि उसका खुद का बच्चा हो। लेकिन हर जोड़े के अपने बच्चे नहीं होते हैं। पिछले दो दशकों में बांझपन का प्रतिशत काफी बढ़ गया है। यदि शादी के एक साल बाद गर्भनिरोधक का उपयोग किए बिना कोई जोड़ा संभोग के बाद भी गर्भवती नहीं होता है, तो इसे बांझपन कहा जा सकता है।

Infertility Causes in Hindi

हर कपल चाहता है कि उसका खुद का बच्चा हो। पर कँख्या भी कभी ऐसा नहीं होता। पिछले दो दशकों में बांझपन की संख्या काफी बढ़ गई है। यह समस्या महिला या पुरुष या दोनों के कारण हो सकती है। इसीलिए विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में और मान्यता प्राप्त लैब में पुरुषों और महिलाओं दोनों का परीक्षण किया जाना समान रूप से महत्वपूर्ण है। उस चिकित्सा रिपोर्ट के आधार पर, एक विशेषज्ञ चिकित्सक व्यक्तिगत उपचार की रूपरेखा निर्धारित कर सकता है।

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महिलाओं में बांझपन के कारण:

- अनियमित मासिक धर्म

- अंडकोष से स्त्रिबिज का बहार न निकलना जो पीसीओएस नामक बीमारी हो सकती है। यह शरीर में हार्मोनल परिवर्तन लाता है और अंडाशय की सूजन का कारण बनता है। इस स्थिति को पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) कहा जाता है। यह हाल के दिनों में बांझपन का एक प्रमुख कारण बन गया है।

- गर्भनलिका का बंद होना या अकार्यक्षम

- गर्भाशय अपरिपक्व है या इसमें गाठे (फाइब्रॉएड) हैं

- थायराइड ग्रंथि ठीक से काम न करना

- बदलती जीवनशैली / तनाव

- शराब, धूम्रपान जैसी बुरी लत लगना

- अनियमित भोजन और, बाहर के या एयरटाइट कंटेनरों में खान पान और मुख्य रूप से घरेलू भोजन की कमी

- करियर, अन्य सांसारिक जिम्मेदारियों, कठिनाइयों के कारण शादी के बाद भी कई वर्षों तक कैरियर या परिवार नियोजन को प्राथमिकता देकर देर से शादी

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बांझपन उपचार के तरीके:

- सबसे पहले, बिना किसी देरी के विशेषज्ञ चिकित्सक द्वारा उपचार शुरू किया जाना चाहिए। अपने चिकित्सक को अपनी वैवाहिक स्थिति के बारे में बिना संकोच बताये, ताकि आप अच्छे से अच्छे उपचार का लाभ उठा सकें।

- डॉक्टर की सलाह के अनुसार तुरंत मेडिकल चेकअप करवाना चाहिए।

- सोनोग्राफी द्वारा अंडाशय की जांच की जाती है और यदि आवश्यक हो तो अंडाशय को गर्भावस्था के लिए तैयार किया जाता है।

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- हिस्टेरोस्कोपी द्वारा गर्भाशय के अंदर की जांच करके, आंतरिक परत को एक चिकित्सा उपकरण से खुरच कर जांच के लिए लैब में भेज दिया जाता है। इस परीक्षा से महिला की समस्याओं का निदान किया जा सकता है, चाहे गर्भाशय में कोई संक्रमण है या नहीं।

IUI उपचार में, मासिक धर्म के दूसरे दिन से महिला को गोलियाँ / इंजेक्शन देकर अंडाशय में अच्छी गुणवत्ता वाले अंडे बनाए जाते हैं और उन अंडों के फॉलिक्युलर स्टडी के बाद, गर्भाशय के अंदर पति के वीर्य को छोड़ते हैं। 

इस विधि में, पति के वीर्य के नमूने लिए जाते हैं और उच्च गुणवत्ता वाले, शुक्राणु को कैथेटर के माध्यम से गर्भाशय में छोड़ा जाता है। 

इस उपचार की कुछ सीमाएँ हैं और इस प्रणाली की सफलता दर 15 से 20 प्रतिशत है। यदि यह उपचार प्रणाली सफल नहीं रही, तो डॉक्टर की सलाह पर अगली एडवांस उपचार पद्धति को अपनाया जाना चाहिए।

साथ में जोड़ों को काउंसलिंग की जरूरत होती है और यह वक्त की जरूरत है। यह नहीं भूलना चाहिए कि समुपदेशन बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उपचार के दौरान सयंम बरते और अपने डॉक्टर पर भरोसा करें।  और पढ़े.... 

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